तुम और हम
जब मिले थे
तब जैसे इन्द्रधनुष
पर इन्द्रधनुष
होता है
प्रकृति से ही
मायावी
और अब
ज्ञात हुआ
तुम्हारे प्रेम का निर्मल झरना
केवल मेरी
मृगतृष्णा
मेरे निस्वार्थ प्रेम की बारिश
केवल मायावी इन्द्रधनुष
अब सोच रहा हूँ
ये सम्मोहन
पहले तुम तोड़ो ,
के मैं तोडू
जब मिले थे
तब जैसे इन्द्रधनुष
पर इन्द्रधनुष
होता है
प्रकृति से ही
मायावी
और अब
ज्ञात हुआ
तुम्हारे प्रेम का निर्मल झरना
केवल मेरी
मृगतृष्णा
मेरे निस्वार्थ प्रेम की बारिश
केवल मायावी इन्द्रधनुष
अब सोच रहा हूँ
ये सम्मोहन
पहले तुम तोड़ो ,
के मैं तोडू
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