जुस्तजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने
तुझ को रुसवा न किया, खुद भी पशेमा न हुए,
इश्क की रस्म को इस तरह निभाया हमने
कब मिली थी, कहाँ बिछड़ी थी, हमें याद नहीं
ज़िन्दगी तुझ को तो बस ख्वाब में देखा हमने
अदा और सुनाये भी तो क्या हाल अपना
उम्र का लम्बा सफ़र तै किया तनहा हमने
Translation not possible.
Monday, 14 March 2011
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