आओ।
तुम नहीं जानते हो
दुनिया है।
बच्चे की तरह
ये मान कर चले हैं हम
की बारह ही रंग होते हैं दुनिया में
पर ये दुनिया है
ये अपने
दूधिया से ले कर स्याह तक
सभी रंग दिखाएगी तुम्हे
और तुम
विस्मित से देखोगे।
पहले नाम देने की चेष्टा भी करो शायद
पर नाम
जल्द ही ख़त्म हो जायेंगे
और रंगों का आपसी फर्क भी।
तब
समभाव
जानोगे तुम
और बुदध के सामान
ज्ञाता होगे।
Friday, 25 March 2011
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