अब मुझे कोई इंतज़ार कहाँ...
वो जो बहते थे आबशार कहाँ...
आँख के एक गाँव में, रात को ख्वाब आते थे,
छोने से बहते थे, बोले तो कहते थे,
उड़ते ख़्वाबों का ऐतबार कहाँ?
जिन दिनों आप रहते थे, आँख में धुप रहती थी,
अब तो साए ही साए हैं, ये भी जाने ही वाले हैं..
वो जो था दर्द का करार कहाँ?
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